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रोज़े
रोज़े
1- इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
2- आपका क्या ख़याल है कि अगर मैं फ़र्ज़ नमाज़ें पढ़ूँ, रमज़ान के रोज़े रखूँ और हलाल को हलाल जानूँ
5- इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
20- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में शाबान से अधिक रोज़ा (उपवास) नहीं रखते थे
23- अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आशूरा के दिन (मुहर्रम की दसवीं तारीख़ को) रोज़ा रखा
24- और मैं साद बिन अबी बक्र नामी क़बीले से ताल्लुक़ रखता हूँ।
48- लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे।
51- तुम लोग सहरी खाया करो, क्योंकि सहरी में बरकत है।
52- रमज़ान से एक या दो दिन पहले रोज़े न रखो। परन्तु जो व्यक्ति (पहले से) रोज़े रख रहा हो, वह रख सकता है।
55- शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो।
