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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह - الصفحة 12
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह - الصفحة 12
1- जिसने हमपर हथियार उठाया, वह हममें से नहीं है।
2- चोर का हाथ एक चौथाई दीनार या उससे अधिक में काटा जाएगा।
3- अल्लाह की सीमाओं के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी और अपराध पर किसी को दस कोड़ों से अधिक नहीं लगाया जाएगा।
6- वापस जाकर फिर से नमाज़ पढ़ो, क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं।
11- लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे।
15- तुम लोग सहरी खाया करो, क्योंकि सहरी में बरकत है।
16- रमज़ान से एक या दो दिन पहले रोज़े न रखो। परन्तु जो व्यक्ति (पहले से) रोज़े रख रहा हो, वह रख सकता है।
18- किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।
22- शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो।
28- यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया।
33- तब तुम मुझे गवाह मत बनाओ। क्योंकि मैं किसी अन्याय का गवाह नहीं बनता।
38- सुन लो! शराब हराम कर दी गई है।
42- नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना।
44- लुंगी का जो भाग टख़नों से नीचे लटकेगा, वह जहन्नम में जाएगा।
